उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत का एक बयान सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। जिसमें उन्होंने एक टीवी न्यूज़ चैनल को साक्षात्कार देते हुए खनन सचिव को लेकर कुछ गलत कह दिया।
उनका बयान जैसे ही वायरल हुआ तो अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी। वहीं अब उनके बयान को लेकर उत्तराखंड IAS एसोसिएशन खासा नाराज नजर आ रहा है। और उत्तराखंड आईएएस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इसकी शिकायत करने की बात कही है।
संगठन ने सोशल मीडिया का हवाला देते हुए कहा है कि किसी भी तरह से मान सम्मान के साथ समझौता नहीं किया जाएगा।
IAS एसोसिएशन द्वारा लिखा गया पत्र
उत्तराखण्ड आई.ए.एस. एसोशिएसन के अध्यक्ष श्री आनन्द बर्द्धन जी की अध्यक्षता में आज दिनांक 30 मार्च, 2025 को एसोशिएसन के सदस्य द्वारा संदर्भित सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित कथन के संदर्भ में बैठक आहुत की गयी।
बैठक में सर्वसम्मति से निम्न प्रस्ताव पारित किया गया :-
एसोशिएसन के सदस्यों को भी आम नागरिकों की भांति आत्म सम्मान, गरिमा का अधिकार सहज और स्वाभाविक रूप से प्राप्त है। किसी व्यक्ति, पदाधिकारी, संस्था, संगठन को भरसक ऐसे कथनों, संकेतों से बचना चाहिए जिससे संगठन के सदस्यों व उनके परिवार का आत्मसम्मान आहत होता हो, उनके स्वाभिमान को ठेस पहुंचती हो। ऐसी मनोदशा में एसोसिएशन के सदस्यों का मनोबल क्षीण होता है, वहीं हतोत्साहित परिवेश में एसोसिएशन के सदस्यों की दक्षता, कार्य क्षमता, डिलीवरी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।
2- एसोशिएसन के सदस्य लोक सेवक के रूप में निर्वाचित सरकारों की नीतियों को संवैधानिक दायरे में व्यावहारिक रूप देते हुए प्रभावी तरीके से धरातल पर लागू करते हैं। व्यवस्था को स्थिरता, निरंतरता प्रदान करते हुए तटस्थता, अनामता के सिद्धांत को दृढ़ता से बनाए रखना मशीनरी का मूल स्वभाव है।
3- एसोशिएसन किसी भी प्रकार की आलोचना, असहमति, निंदा को आत्म सुधार के अवसर के तौर पर लेता है। रचनात्मक आलोचना भविष्य की नीतियों को आधार प्रदान करती है यदि नीतियों के क्रियान्वयन में कहीं त्रुटियां कमियां परिलक्षित होती हैं तो उनके निराकरण हेतु पृथक् से व्यवस्था निर्धारित की गई है। जहां भी कमियां इंगित होती हों, यथासंभव निर्धारित प्रक्रिया का अनुसरण किया जाना चाहिए।
अतः एसोशिएसन समाज के सभी पक्षों से एसोशिएसन व उसके सदस्यों के प्रति व्यक्ति की गरिमा, आत्मसम्मान के अधिकार को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए सम्मानजनक व्यवहार की अपेक्षा करता है।
उक्त प्रस्ताव (Resolution) को मीडिया से साझा करने के साथ मा० मुख्यमंत्री जी एवं मुख्य सचिव उत्तराखण्ड को ज्ञापन के रूप में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया।
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